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घरेलू हिंसा

चिन्ता प्रसाद ‘माहेश्वरी’

नये पल्लव 11 अंक से

घरेलू हिंसा … महिला संरक्षण अधिनियम 2005, भारत की संसद से पारित एक अधिनियम है, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना व पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। यह कानून 26 अक्टूबर, 2006 को लागू हुआ।
क्या है घरेलू हिंसा : किसी महिला को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना घरेलू हिंसा है।

  1. शारीरिक हिंसा : महिला के साथ मारपीट करना, थप्पड़ मारना, लात मारना या किसी और तरह का शारीरिक चोट पहुंचाना।
  2. मानसिक हिंसा : गाली देना, अपशब्द बोलना इत्यादि।
    किससे संपर्क करें : पीड़िता कानूनी सहायता के लिए पुलिस से या फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट से संपर्क करें। प्रत्येक राज्य सरकार अपने राज्य में संरक्षण अधिकारी नियुक्त करती है। इसके अलावा एक सेवा प्रदाता ऐसा संगठन है, जो महिलाओं की सहायता करती है।
    घरेलू हिंसा के मामले में कौन शिकायत दर्ज करे : पीड़िता स्वयं शिकायत दर्ज करा सकती है। रिश्तेदार या पड़ोसी भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
    कानूनी सहायता : पीड़िता निःशुल्क कानूनी सहायता की मांग कर सकती है। प्रतिवादी को भारतीय दंड संहिता IPC के तहत तीन साल की सजा हो सकती है।
    पीड़िता को प्रतिवादी से आर्थिक सहायता और आवासीय सुविधा प्राप्त हो सकती है।
    यह भी तथ्य सामने आया है कि इस कानून का कुछ महिलाएं दुरुपयोग कर रही हैं, जिससे समाज को बचना चाहिए।

लेखिका पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं।

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