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पथरीली भूमि पर किसानों ने कर दिखाया करिश्मा

अतिरिक्त आय का स्रोत बनी फूलों की खेती

जहां चाह वहां राह… वाली कहावत हकीकत में तब ही साकार होती है, जब आदमी संकल्पित होकर कार्य करता है। राजगढ़ ब्लॉक (मीरजापुर) अंतर्गत बघौड़ा गांव के दो युवा किसान ने बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर फूल की खेती कर एक अनूठा कारनामा कर दिखाया है। इन दोनों युवा किसान ने बंजर भूमि पर ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ वाली कहावत को गलत सिद्ध कर दिया है। अपनी खून-पसीने की मेहनत से बंजर भूमि पर चमत्कार कर दिखाया। सूनी पड़ी पथरीली भूमि पर फूल की खेती से बदलाव की बयार बह रही है। अब पथरीली भूमि किसानों के लिए सोना उगल रही है। पथरीली भूमि पर हरियाली लाने के लिए उन्नत तकनीक अपनाकर दोनों युवा किसान उन्नत हो गए हैं।
यूरिया खाद व पानी की समस्या ऊपर से प्रकृति की मार धान और गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होता है। फसल पैदा करने के बाद तमाम प्रकार की परेशानियां होती हैं। इससे धान, गेहूं की खेती से किसानों का मोहभंग हो रहा है। तमाम परेशानियों से बचने के लिए राजगढ़ ब्लॉक अंतर्गत बघौड़ा गांव के दो युवा किसान धान, गेहूं की खेती छोड़ फूलों की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। साथ ही अगल-बगल के किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
युवा किसान सुशील यादव व प्रमोद यादव ने घर के पास पथरीली भूमि पर एक एकड़ क्षेत्रफल में लाल और पीला गेंदा के फूल की खेती की है। अबतक 15 क्विंटल फूल लगभग 80 हजार रुपये का बेच चुके हैं। अभी दिसम्बर और जनवरी तक इनका फूल निकलेगा। सुशील ने बताया कि पहला साल है, अनुभव की कमी थी। अगस्त माह में एक एकड़ में छह हजार पौधे लगाए थे। अक्टूबर नवरात्रि से पुष्प निकलना प्रारंभ हुआ। अभी तक डेढ़ टन फूल निकल चुका है। इसका गजरा बनाकर वाराणसी बाजार में 75 हजार रुपये का बेचा है।
किसान प्रमोद ने बताया कि धान-गेहूं की पैदावार से रोज-रोज पैसा नहीं मिलता, इसलिए हम लोगों ने अतिरिक्त आय का स्रोत फूल की खेती को बनाया है। इसके लिए मीरजापुर से लाल और पीला गेंदा के पौध लाए हैं। पुष्प की क्वालिटी अच्छी है। एक पेड़ से लगभग सात किलोग्राम पुष्प निकलेगा। एक किलोग्राम में डेढ़ सौ फूल आते हैं और एक गजरे में 40 पुष्प लगते हैं। इस प्रकार चार माला तैयार होता है। हर रोज बाइक से 70 किमी दूर जाकर 20 रुपये प्रति माला 200-300 माला बेचते हैं। इस प्रकार चार से पांच हजार रुपये रोज की बिक्री होती है। कुल खर्च काटकर तीन हजार रोज बचता है। अब जनवरी तक फिर पुष्प निकलेगा। प्रति पौधा 500 रुपये आमदनी होगी। इस प्रकार छह हजार पौधों में कुल तीन लाख की बचत होगी, जो फायदे का सौदा होगा। यदि मार्केट अच्छा रहा तो अगले साल दो एकड़ में फूल की खेती करेंगे।
जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि राजगढ़ क्षेत्र में जो फूल की खेती की जा रही है, वह सराहनीय है। जो भी सरकारी योजनाएं आएंगी, अप्रैल माह में पंजीकरण कराकर उसका लाभ किसानों को दिलाया जाएगा। फूल की खेती लाभ की खेती होगी।

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