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सागर की लहरें

प्रो. डाॅ. सुधा सिन्हा

चांदी सी लहरें उफनती जा रही है
दिल पहलू से निकलता जा रहा है
डर है कहीं यह गुम न हो जाये
यही डर मुझे सताये जा रहा है
अब मुझको भूलना ही पड़ेगा
अगले जन्म की प्रतीक्षा रहेगी
सागर बाहें फैलाय आ रहा है
सासों में मुझे समाये जा रहा है
सागर से मेरी पहचान हुई है
लहरें मेरी दिलोजान हुई हैं
इठलाते हुए वह कैसे आता है
बाहों में मुझे लपेटे जा रहा है।

2 चाहत
जीवन में कई बार ऐसे मिल जाते हैं
पा नहीं सकते पर चाह तो सकते हैं
पंख लगा करके ऊपर उड़ जाते हैं
सितारों की दुनिया में जा तो सकते हैं
दूर जाकर भी याद उन्हें करते हैं
सपनों में उनको बसा तो सकते हैं
उनका नाम लेते धड़कने बढ़ जाती हैं
दिल की धड़कन बना तो सकते हैं
सुधा कहती है भूल नहीं पाती
काजल सी आंखों में लगा तो सकते हैं।

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