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सघन अनुभूति गूंज के साथ लिखी गई कविताएं

सतीश राठी

‘मैं कोई कविता नहीं लिख रहा, मैं तो जिंदगी को समझने की कोशिश कर रहा,।’ – ये पंक्तियां श्री अमी की एक कविता की पंक्तियां हैं। जब कोई कवि जिंदगी को समझने की कोशिश करता है, तो पाठक को सोचने और विचारने की ताकत देता है और ऐसे ही विचार मन में आए, हवा की तरह, तूफान की तरह और मन में कविता रचे, तो फिर जीवन में परिवर्तन की गुंजाइश बनी रहती है। कहा जाता है कि यह बड़ा कठिन और जटिल समय है। मनुष्य की संवेदनाएं हाशिए पर हैं। श्री चंद्रकांत देवताले ने अपनी एक कविता में कहा है, ‘यह वक्त वक्त नहीं एक मुकदमा है, या तो गवाही दो या हो जाओ गूंगे, हमेशा हमेशा की तरह।’
‘‘इस कविता में जो देवताले जी ने कहा है, उसका संदेश यही है कि एक अच्छी कविता हमें गूंगा होने से बचाती है। इसी विश्वास के भरोसे कवि लिखता है, ‘इस सन्नाटे में गूंजते हैं मेरे शब्द / थोड़े से शब्द रख लेना / ताकि संवाद बना रहे।’ … शब्दों की गहरी चिंता मैंने सिर्फ और सिर्फ श्रीचरण सिंह अमी की कविताओं में देखी है। इनकी कविताएं सघन अनुभूति गूंज के साथ लिखी गई कविताएं हैं।’’ – ये विचार ‘क्षितिज’ संस्था, इंदौर द्वारा आयोजित श्री चरण सिंह अमी के कविता संग्रह एवं आलेखों की कुल पांच पुस्तकों के लोकार्पण प्रसंग पर अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समालोचक श्री महेश दुबे द्वारा व्यक्त किये गए।
क्षितिज द्वारा श्री अमीन की जिन पांच किताबों का लोकार्पण किया गया, उनके नाम हैं – दिन भर दिन, अपूर्व अचंभे की तरह, स्त्री पक्ष, संगोष्ठी संवाद एवं फेसबुकिया तथा अन्य प्रेम कविताएं।
इस प्रसंग पर दिल्ली से पधारे वरिष्ठ कथाकार श्री बलराम ने कहा, ‘‘स्त्रियां समाज में आज भी दबा कर रखी जाती हैं। ऐसा जब समाज में होता है, तो कवि को स्त्री की चिंता करनी चाहिए। श्री चरण सिंह की यह विशिष्ट बात है कि वह ऐसे वक्त में स्त्री का पक्ष रखते हुए स्त्री पक्ष जैसी पुस्तक की रचना करते हैं। ये एक सतर्क कवि हैं, ये सुरक्षित जीवन नहीं चाहते, जोखिम भरा जीवन जीते हैं, जो आज के समय की जरूरत है।’’
वरिष्ठ कथाकार श्री सूर्यकांत नागर ने श्री अमी के साथ अपने 40 वर्षों के संबंधों का जिक्र करते हुए जीवन के बहुत सारे संस्मरण सुनाए। यह भी बताया कि किस तरह के कठिन जीवन से गुजरते हुए कवि आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं और अपनी शारीरिक अक्षमताओं के बाद भी निरंतर सृजन में रत रहे हैं। एक साथ पांच किताबों को लेकर आना कोई सामान्य बात नहीं है और जितना कुछ कवि के भीतर आज भी उबल रहा है, उससे ऐसा लगता है कि शीघ्र ही उनकी पांच किताबें और आ जाएंगी। कवि निरंतर सृजनरत है, यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
इन कविताओं पर कवि श्री आर.एस. माथुर ने कहा, ‘‘दोनों ही कविता पुस्तकें समाज के विद्रूप के ऊपर अपनी बात कहती हैं और संतुष्टि का भाव भी इससे जागृत होता है, किंतु लेखक तमाम नाइंसाफी रखते हुए भी मजबूर है, क्योंकि समाज के वर्तमान रवैये के खिलाफ उसके पास इतना साहस भी नहीं है, साधन भी नहीं कि उनको बदल सके या उनमें कोई परिवर्तन ला सके। किंतु सुख, दुख और आज के हालात से उसका असहमत होना प्रत्येक रचना में स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।’’
यह प्रेम की स्थिति भी फेसबुक के ऊपर आ गई। प्रेम योग नितांत वैयक्तिक घटना है। कई कविताएं मजबूर हैं, लेकिन संघर्ष करती हैं। परास्त हो जाती हैं, किंतु अमी नहीं होते और ईमानदारी से अपनी बात कहते हैं। अमी ने प्रेम के कुछ फार्मूलों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। गोया प्रेम भी किसी फाॅर्मा में ढाला जा सकता हो। वे आज के माहौल से निराश हैं, लेकिन उनकी तीखी नजर से गुजरे बिना ये सब कुछ घटित भी नहीं हो रहा है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री बी.एल. पानेरी, श्री राकेश मलिक, श्री अश्विनी कुमार दुबे, कविता वर्मा एवं राजेंद्र जोशी के द्वारा अतिथियों का पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन क्षितिज के अध्यक्ष श्री सतीश राठी ने किया तथा आभार व्यक्त किया श्री अशोक शर्मा भारती ने।

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