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काश ! जिन्दगी एक किताब होती

Shubhi Mishra

पढ़ सकती मैं कि आगे क्या होगा
क्या पाऊंगी मैं और क्या दिल खोयेगा
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा
काश ! जिन्दगी एक किताब होती।

फाड़ सकती मैं उन लम्हों को
जिन्होंने मुझे रुलाया है,
जोड़ती कुछ पन्ने जिनकी
यादों ने मुझे हंसाया है,
हिसाब तो लगा पाती कितना
खोया और कितना पाया है
काश ! जिन्दगी एक किताब होती।

वक्त से आंखें चुराकर पीछे चली जाती,
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाती,
कुछ पल के लिए मैं भी मुस्कुराती,
अपनों के साथ हर पल बिताती,
काश ! जिन्दगी एक किताब होती।

जिन्दगी की खूबसूरत कस्ती

ये जो मेरी जिन्दगी की खूबसूरत कस्ती है,
दोस्तों के प्यार के सागर में ही तो चलती है।

जिसने मेरी हर मुश्किल को आसान किया,
बस उसी की मदद से ही बढ़ती मेरी हस्ती है।

जिसने अपनी खुशियां छुपाकर हमें खुशियां दीं,
उसके प्यार के सामने दुनिया कितनी सस्ती है।

जब भी कभी परेशानियों के बादलों ने घेरा,
पता चला उसकी दुनिया मुझमें ही बसती है।

दोस्तों के जाने से मेरी रूह भी बेचैन है,
तड़प उठा हूं मैं, बंद हुई सारी मस्ती है।

एक कोरा कागज ही था मैं जबतक अकेला था,
अब मेरी कलम भी दोस्तों की तारीफ में ही बहती है।

Address : Shastri Nagar, Sultanpur, UP

School : SVM School, Sultanpur   Class : 9th

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