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वाह सेक्स ! आह सेक्स !!

राजीव मणि

पूरी दुनिया में सभी तरह के कारोबार या व्यापार में वह सेक्स और सेक्स से जुड़ी चीजें ही हैं, जिसमें सबसे ज्यादा रुपयों का लेन-देन होता है। कहने का सीधा सा मतलब है – नौ की लागत, नब्बे आमदनी।
खैर ! मैं आपको एक घटना बता देता हूं। एकबार एक बड़े कारोबारी की मुलाकात मुझसे हो गयी। परिचय हुआ, फिर कुछ इधर-उधर की बातें। इसी क्रम में उन्होंने मुझसे मजाक में ही कहा – आप तो पत्रकार हैं, दिमाग भी काफी तेज चलता है, कोई ऐसा व्यापार बताइए, जिससे मैं पूरी दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन जाऊं।
मैं सोंच में पड़ गया। तभी अचानक मेरे मुंह से निकला – है न, आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी तो क्या, पूरे विश्व में प्रसिद्ध और डिमान्ड वाले आदमी भी बन जायेंगे। हरे-हरे नोटों और ख्याति की बात सुनकर वे मेरे पैर पकड़ लिए –
‘तो बताते क्यों नहीं हो भगवन।’
काफी मुश्किल से मैं अपने पैर छुड़ा पाया था। फिर विनम्रता से पूछ बैठा – ‘क्या आप कर पायेंगे ?’
‘आप बताइये तो सही।’
‘क्या आप थर्मामीटर की तरह कोई सरल यंत्र बना सकते हैं जिसे किसी अविवाहित को लगाते ही पता लग जाए कि उसने अभी तक सेक्स किया है या नहीं ?’
‘इससे क्या होगा जी, बकवास आइडिया है।’
‘अजी बकवास नहीं, धनवर्षा आइडिया है। अगर आप ऐसा कर पाते हैं, पूरी दुनिया में एक क्रांति आ जायेगी। विवाह से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे को परख सकेंगे कि ……।’
‘और ?’
‘अविवाहित रह सेक्स जैसी अच्छी और कुदरती चीजों को बदनाम करने वालों पर वज्रपात हो जायेगा। अभिभावक अपने बच्चों के घर लौटने पर वही यंत्र लगाकर चेक कर लिया करेंगे। कंडोम, शक्तिवर्धक और गर्भनिरोधक गोलियों की बिक्री का ग्राफ तेजी से गिरेगा। आपके यंत्र की बिक्री पूरी दुनिया में हाथोंहाथ होगी। आप 21वीं सदी के विश्व नायक बन जायेंगे। अपने अविवाहित बच्चों से परेशान लोग आपकी पूजा देवता की तरह करेंगे। और इस महान क्रांतिकारी खोज के लिए, हो सकता है, आप नोबेल पुरस्कार भी पा जायें।’
‘थैंक्यू मान्यवर ! आप तो साक्षात देवता निकले।’ यह बड़बड़ाते हुए महाशय चले गये। बाद में मुझे होश आया कि फ्री में अपना कीमती आइडिया देकर मैंने गलती की। खैर ! मुंह से निकली बात और छुटा हुआ तीर वापस कब लौटता है।
अगले दिन सुबह अखबार लेकर बैठा। धीरे-धीरे कर पूरा अखबार चाट गया। बलात्कार की पूरी बीस खबरें निकलीं। एक भी पाॅजिटिव खबर नहीं ! तंग आकर टीवी सेट के सामने बैठ गया। जैसे ही न्यूज चैनल लगाया, ‘दिल्ली में चलती कार में गैंग रेप’ मिला। टीवी बंद कर मैं सोंच में पड़ गया – क्या किसी को सेक्स के अलावा भी कुछ दिखता है। तभी मुझे एक अखबार के संपादक की बात याद आई। एकबार उन्होंने पत्रकारों की बैठक में कहा था – एक सर्वे में यह बात सामने आयी है कि सेक्स की खबरें हर उम्र के लोग सबसे ज्यादा पढ़ते-देखते हैं। यह याद कर दिल को थोड़ी राहत मिली।
शाम का वक्त था। मैं बाजार में था। तभी हल्ला हुआ कि माॅल के चेंजिंग रूम में कैमरा पकड़ाया है। किसी ने कपड़ा बदल रही लड़की का एमएमएस बना लिया है। पुलिस जांच कर रही है। मैं आज तक नहीं समझ पाया कि सीसीटीवी कैमरा, स्पाई कैमरा या मोबाइल का आविष्कार गलत काम के लिए हुआ है या सही के लिए। यह भी सर्वे का विषय हो सकता है कि इन उपकरणों का कितना सही और कितना गलत उपयोग किया गया है।
जब दुनिया इतना आगे बढ़ गयी, तो फिर ड्रेस की बात ही बेकार है। ड्रेस सेक्सी है या नहीं, इसकी चर्चा तो बेवकूफ लोग ही करते हैं। मानव सभ्यता के विकास जितनी पुरानी ही है ड्रेस की कहानी। तो फिर इसकी चर्चा क्यों, चर्चा तो बैंगन जैसी सब्जी की होनी चाहिए। कई साल बीत गये। मुझे याद है वह घटना जब एक गल्र्स हाॅस्टल के शौचालय से कई पसेरी बैंगन मिली थी। अखबार में खबर छपने से पहले ही पूरे शहर में यह टीआरपी पा गयी। तब सब्जी वाले भी किसी लड़की को देख कहते थे – यह वाला लिजिए मैडम, आपके लिए अच्छा रहेगा।
वैसे एक एड्जूकेशनल चैनल पर देर रात एक कार्यक्रम आता है, उसमें यह बताया जाता है कि सेक्स ने कैसे पूरी दुनिया को बदल दिया। सच कहा जाए तो हर चीज का सम्बन्ध सेक्स से रहा है। टीवी सेट, रेडियो, अखबार, पत्रिका में सेक्स से जुड़े विज्ञापन तो रहते ही हैं, साथ ही काफी कुछ। सच तो यह भी है कि हम अपने आसपास जितनी चीजे देखते हैं, सभी का जुड़ाव किसी न किसी रूप में सेक्स से रहा है। नादान लोग कह सकते हैं नहीं। समझदार चुप रह जायेंगे। कारण कि वे जानते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। नहीं तो कार का सम्बन्ध सेक्स से क्या हो सकता था ? लेकिन, सच्चाई है कि कार में अबतक हजारों बलात्कार की घटनाएं हुई हैं।
सच को स्वीकारने में कोई हरज नहीं। मैं स्वीकारता हूं कि मैं ही इस मामले में बहुत अनाड़ी हूं। अब समाज से कुछ-कुछ सीख रहा हूं। पिछले दिनों एक मित्र मिला। स्वभाव से थोड़ा मजाकिया है, बोला – ‘आप जानवर वाला आइटम देखे हैं या नहीं ?’ मैं हैरान हो सोचने लगा कि ‘जानवर वाला आइटम’ क्या होता है। पूछ बैठा – ‘यह क्या है ?’ उसने अपने मोबाइल पर जो दिखाया, मैं यहां लिख नहीं सकता। साथ ही यह भी मार्गदर्शन कर गया कि इंटरनेट पर तो इसकी ‘गंगा’ बहती है।
कभी-कभी लगता है कि साधु-संत बन कमंडल ले जंगल चले जाना ही ठीक है। लेकिन, इतिहास की अप्सराएं डराती हैं। वर्तमान के कुछ संत मुझे ऐसा करने से रोकते हैं। और मंदिर की देवदासियां …..।
तो यह विचार छोड़ कुछ दूसरी बात करता हूं। मैं एक विवाह समारोह में गया था। जलमासे में शादी पर ही बात निकली। एक सज्जन ने कहा – यह तो ऐसी चीज है कि जो खाये वह भी पछताए, जो न खाये वह भी पछताए। दूसरे ने कहा – जब ऐसा ही है, तो खाकर ही पछताना ठीक है। इसी बीच न जाने कब समधी जी प्रकट हो गये। उन्हें चुहलबाजी सुझी, कुछ फूल फेंककर मारा। भीड़ में से कोई बोल पड़ा – क्या सेक्सी फूल है ! बाद में पता चला कि समधी जी एक-दो पैग चढ़ाकर आये थे। वैसे शराब और शबाब की रिश्तेदारी पुरानी है।
पिछले दिनों एक वेबसाइट पर रिपोर्ट पढ़ने को मिली। रिपोर्ट पढ़कर बेहद चिन्ता हुई। लिखा था – अब पत्रिकाओं को पाठक नहीं मिल रहे हैं। एक-एक कर कई पत्रिकाएं बंद हो चुकी हैं। अभी हाल ही में एक बड़े प्रकाशन समूह ने अपने तीन क्षेत्रीय संस्करण बंद करने की घोषणा की है। मैं सोंचने लगा, कैसे हम पत्रकारों का घर चलेगा। जब इतनी अच्छी पत्रिकाएं बंद हो जायेंगी, तो क्या होगा। मुझे पत्रिका स्टाल की आखोंदेखी बात याद हो आई। पाठक आते थे, कई पत्रिकाएं उलट-पुलट कर देखते थे, तब जाकर सबसे सस्ती कोई पत्रिका खरीदते थे। उन्हीं के बीच एक युवक आया। दुकानदार से पूछा – ‘देशी बाबा टाइप कोई पत्रिका है ?’ दुकानदार इधर-उधर देखने लगा। जिस बोरा पर वह बैठा था, उसके नीचे से एक छोटी-पतली पत्रिका टाइप पुस्तिका मोड़कर निकाला। उसे देते हुए बोला – जल्दी से पचास रुपए निकालो और पाॅकेट में रखकर चलते बनो। घर जाकर पढ़ना। बाद में मुझे पता चला कि यहां तो पचास रुपए में पच्चीस पन्नों वाली अश्लील पुस्तिका मिलती है। और इसकी खूब बिक्री है।
अब और क्या कहूं, सेक्स है ही वैसी चीज। जब पांचों अंगुली घी में हो तो ‘वाह सेक्स’ और जब दाल न गली तो ‘आह सेक्स’ ! दूसरों को छोडि़ए, अपनी ही बात करता हूं। जवानी में एक लड़की से मुहब्बत कर बैठा। वैसे मुहब्बत तो आजकल लड़की-लड़की, लड़का-लड़का और आदमी/औरत जानवर से भी करते हैं। मैंने लड़की से ही की थी। उसने मेरे सामने एक शर्त रखी। बोली – डार्लिंग, अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो, तो रोज एक प्रेमपत्र मुझे दोगे। मैंने कहा कि रोज मिलना ही है तो प्रेमपत्र क्यों ? वह अपनी बात पर अड़ गयी। मुझे मानना पड़ा। साल भर लगातार उसे प्रेमपत्र देता रहा। अगले साल मुझे पता चला कि उसने उन प्रेमपत्रों को किताब के रूप में अपने नाम से छपवा लिया है। मैं सन्न रह गया।
मेरे पास और कोई चारा नहीं था। मन को समझाना पड़ा। किसी तरह खुद को तसल्ली दे पाया कि आजकल नफा-नुकसान का ही नाम प्रेम है। ब्वाॅय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड का ट्रेंड इसी पटरी पर दौड़ रहा है। नफा-नुकसान तो आप समझ ही गये होंगे।
वैसे चलते-चलते एक सलाह अवश्य देना चाहूंगा। ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी’ याद रखना। आपको जीवन में ‘वाह सेक्स’ चाहिए या ‘आह सेक्स’, खुद ही निर्णय कर लें। वजह साफ है ‘इट्स माॅय च्वाइस’ के बाद कोई लाइफ लाइन शेष नहीं रहता। ईश्वर आपकी रक्षा करे।

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