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बेटी के ब्वॉय फ्रेंड के मामले में समझदारी से लें काम

मीना को कॉलेज से लौटे अभी पंद्रह मिनट ही हुए थे कि फोन की घंटी बजने लगी। वह फोन की ओर तेजी से लपकी और रिसीवर को कान से लगा लिया। अभी उसने ठीक से नाष्ता भी नहीं किया था, लेकिन फोन आने पर वह घंटों बतियाती रही। कई दिनों तक उसकी मां इस बात को नजरअंदाज करती रही, मगर अब उन्हें अपनी बेटी की हरकत खलने लगी और फोन पर बात करते समय उसके आसपास आकर खड़ी हो जाती। मां की यह हरकत मीना को नागवार लगती है। वह उन्हें इस कदर धूरकर देखती है, मानो वह उसकी मां न होकर दुष्मन हो।
ये ब्वॉय फ्रंेड आज के अधिकांष माता-पिता को परेषान करते हैं। इन दिनों बोल्ड होकर उभरे हैं ये संबंध। पर ज्यादा परेषानी होती है ब्वॉय फ्रंेड से। आधुनिकता की परत के नीचे मानसिक तौर पर परंपरावादी माता-पिता को अपनी बेटी के ये संबंध गले नहीं उतरते। पर कोई चाहे कितना भी परेषान, दुखी या क्रोधित हो, ब्वॉय फ्रंेड एक यथार्थ बन चुका है। यह चलन न केवल महानगरों, बल्कि बड़े-छोटे षहरों या कस्बों तक में तेजी से बढ़ा है। और इस दोस्ती का लक्ष्य आमतौर पर विवाह नहीं। अगर हो जाए तो बात अलग!
माता-पिता खासतौर पर लड़की की मां को यह बिल्कुल पसंद नहीं कि उनकी बेटी किसी लड़के के साथ धुमे-फिरे। पर मजबूरी यह है कि बेटी पर एक सीमा से अधिक प्रतिबंध नहीं लगा सकते। आखिर स्कूल तो भेजना ही है। स्कूल के कार्यक्रमों से उसे रोका नहीं जा सकता। ट्यूषन भी जरूरी है। मिलने की हजार जगहें, हजार बहाने हैं। जाहिर है मां लाख चाह कर भी अपनी बेटी को ब्वॉय फ्रंेड बनाने से नहीं रोक सकती। ऐसे में कुढ़ने और गुस्सा होने या डराने-धमकाने से काम चलने वाला नहीं। तब उसे क्या करना चाहिए कि उसकी बेटी की दोस्ती किसी ऐसे लड़के से न हो जाए जो नषा करता हो, लड़कियों को फंसाकर उनका बेजा इस्तेमाल करता हो, उनको गलत रास्ते पर डालता हो या जिसकी नजर लड़की के माता-पिता की धन-दौलत पर हो। ऐसे में सबसे जरूरी तो यह है कि आप अपनी बेटी की दोस्त भी बनें ताकि वह अपने मन की सारी बातें आपसे डरे बिना कह सके। उसे अपने ब्वॉय-फ्रंेड के बारे में सब कुछ बताने को प्रोत्साहित करिए और उसके ब्वॉय-फ्रंेड के परिवार, उसकी षिक्षा, उसके गुणों-अवगुणों को अधिक से अधिक जानने का प्रयास करिए। इसके लिए आप अपनी बेटी की सहपाठियों से जानकारी ले सकती हैं।
इस स्थिति में सबसे पहले तो आपको यह समझना है कि आप बेटी के ब्वॉय-फ्रंेड्स को नापसंद क्यों करती हैं। अच्छा हो कि किसी अवसर पर आप बेटी के दूसरे दोस्तों के साथ उसे भी घर पर बुलाए। उसको अहसास कराए बगैर आप उसका अध्ययन करें। उससे बात करें। उसके परिवार के बारे में जानकारी लें। उसकी रुचियों-अभिरुचियों को जानें-समझें और खुद गंभीरता से समझने की कोषिष करें कि आपकी बेटी उसे क्यों पसंद करती है। साथ ही यह जानने की भी कोषिष करिए कि वह आपकी बेटी को क्यों और कितना पसंद करता है।
उससे बात करने के बाद आप अपनी बेटी से बात करिए और ब्वॉय-फ्रंेड को लेकर आपके मन में जो संदेह और आषंकाएं हों, उनके बारे में बेटी को बताइए। लेकिन अपनी बात पर अड़े नहीं। बेटी को उससे मिलने से मत रोकिए। बल्कि उससे पूछिए कि वह अपने दोस्ती को कहां तक देखती है। और यह कि यदि वो ब्वॉय-फ्रंेड न हो, तो उससे उसे क्या फर्क पड़ेगा। उसे सोचने दीजिए, अपना निर्णय खुद लेने दीजिए। किषोर अवस्था का आकर्षण पहाड़ी नदी-सा होता है। उसके प्रवाह को रोका नहीं जा सकता, मोड़ा जा सकता है। बेटी के उस संबंध के बारे में अपने दूसरे बच्चों से भी बात करिए। अपनी बहन के बारे में आपकी अपेक्षा वे अधिक जानते हैं और षायद उसके ब्वॉय-फ्रंेड के बारे में भी। वे उसकी सोच को अधिक प्रभावित भी कर सकते हैं।
इस संबंध मंे आप अपने पति को षामिल करिए। समय-समय पर बेटी सहित सब मिलकर बात करिए, पर डांटिए-फटकारिए नहीं, चीखिए-चिल्लाइए नहीं। आपका काम अपने और दूसरों के अनुभवों के आधार पर तमाम अच्छे-बुरे पक्ष रखना है। विकल्प प्रस्तुत करना है, और यह ध्यान रखना है कि प्रतिक्रिया में आपकी बेटी कोई ऐसा कदम न उठा ले जो उसके लिए हानिकारक हो।
आजकल के बच्चे ज्यादा सचेत हैं। पहले की तरह भावुक नहीं। अगर उनको लगता है कि उनका ब्वॉय-फ्रंेड सही नहीं, तो वे रास्ता बदलने में देरी नहीं करेंगे। उसे यह कभी महसूस न होने दें कि आप जिद पर अड़ी हैं। बेटी को सोचने का समय दें। अपने ब्वॉय-फ्रंेड का सही मूल्यांकन करने का अवसर दीजिए। उस पर भरोसा करिए कि गलत व्यक्ति को अपने जीवन से बाहर करने में वह देर नहीं करेगी।

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