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समाज की विसंगतियांे से लड़ती क्षणिकाएं

मंजु शर्मा

हरकीरत हीर जी ने क्षणिका संग्रह ‘आग के अक्षर’ उन महिलाओं को समर्पित किया है, जिनकी कलम अक्षरों के माध्यम से समाज में व्याप्त विसंगति रूपी आग से लड़ने का साहस रखती हैं। ‘आग के अक्षर’ संग्रह में संग्रहित क्षणिकाओं में नारी विमर्श समाहित है। लेखिका के नारी मन के घुटन, कभी विरह और अन्याय की आग में जलती, कभी प्रेम रस में पगी हुई, कभी मंद बयार-सी बहती सुवासित पवन, कभी आकाश की चपला सी, कभी समुद्र की गहराई में से निकली धीमी-धीमी मधुर ध्वनि-सी, कभी इठलाती हुई नवयौवना जैसी लहरों-सी, तो कभी तूफानी लहरों-सी विभिन्न रूपों की भावनाएं पुस्तक में अक्षर बन अंकित होकर मन को कभी रोमांच से, कभी आक्रोशित, तो कभी आकाक्षाओं के पँख लगाकर, तो कभी गमजदा कर उद्वेलित करती हैं।
एक बानगी संग्रह की पहली ही क्षणिका में हर उस नारी की व्यथा, जो सदियों से पुरुष प्रधान समाज में प्रचलित रूढ़ियों, रिवाजों के नियमों के आगे अपनी अकांक्षाओं का खामोशी से गला घोटकर जीवन गुजार देती है, व्यक्त हुई है –

  • नृत्य
    याद है मुझे…
    तुमने पहले ही दिन कहा था
    नाचना नहीं आता तो चली जाओ यहाँ से
    मैंने उसी दिन…
    खामोशी के पैरों में बाँध दिए घुँघरू
    और सीखा दिया था उसे
    सबके इशारों पर
    नाचना…।

  • अक्सर मौन रहना सुकून बनकर दवा का काम कर देता है। मनुष्य के जीवन में खामोश रहकर तटस्थता की अहमियत को दर्शाती क्षणिका –
  • तटस्थता
    जरूरी है
    कुछ शब्दों का
    पत्थर हो जाना
    वर्ना
    समंदर समेट लेता है
    हर बहता अक्षर…।
  • खामोशी
    सुनो
    कुछ नज्में मैंने
    जहन में बंद कर
    फेंक दी है चाबी समंदर में
    वो नज्में जो कभी मैंने लिखीं थीं
    तुम्हारे नाम…।

  • एक बानगी देखिये, इस क्षणिका में उस स्त्री की मनोदशा का चित्रण है, जिसको बचपन से ही संस्कारों की घुट्टी पिलाई जाने लगती है और विवाहोपरांत विदाई के समय भी उपहार स्वरूप संस्कारों की गठरी उन्हें निभाते रहने की सख्त हिदायत के साथ थमा दी जाती है और ना चाहते हुए भी संस्कारों के बंधन में जकड़ी ताउम्र इनका पालन करते हुए जिंदगी गुजार देती है।
  • मौन
    गूँगे नहीं हैं
    शब्द मेरे
    बस इसीलिए मौन रहे ताउम्र
    क्योंकि विदा करते वक्त
    माँ ने
    सिल दिए थे मेरे होंठ मेरे…।

  • मोहब्बत की चरमावस्था, जहाँ महबूब के दूर जाने पर अपनी मोहब्बत को सदा जिन्दा रखने की ख्वाहिश लिए अपने उसी महबूब से गुजारिश करती है। वहीं महबूब की सतही मुहब्बत से रूह की अतृप्ती और अधूरी मुहब्बत की तड़प –
  • हिस्सा
    सुनो…!
    वापस लौटते वक्त
    कुछ हिस्सा तुम्हारे पास रह गया था
    उसे बो देना…
    किसी गीली सी मिट्टी में
    क्या पता फूट पड़े कोई पत्ता
    ठूँठ होने से पहले…।
  • मुहब्बत
    कभी जिन पलों में
    नज्म औरत के शब्द उतार
    ओढ़ लेती है चंचल शरारती सा कोई अक्षर
    अगर तुमने…
    उस वक्त निहारा होता
    क्षितिज का आखिरी छोर
    मुहब्बत अपनी कब्र तोड़ लेती….।
  • हरकीरत हीर की रचनाओं की गहराई और जीवन के नवरसों का जो एहसास होता रहा, उसे शब्द देने में बहुत वक्त लग गया। उनकी रचनाओं की गहराई पहले चैंकाती है, फिर सीधे दिल में समा जाती है, मानो हर शब्द को जीते हुए वे खुद एक नज्म बनकर जीती हैं, फिर रचना रचती हैं। उनकी हर एक रचना एक अलग रूहानी संसार में ले जाकर विभिन्न रसों के समुद्र में देर तक गोते लगवाती रहती है। एक से बढ़कर एक दर्द भरी क्षणिकाएं उनकी कलम उगलती है, जो सीधे दिल में उतरती है। कुछ समय के लिए पाठक स्तब्ध-सा रह जाता है, रचनाएँ उसे कचोटती हैं, लेकिन अपनी भावनाएं- विचार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिल पाते। समंदर-सा गहराई लिए लेखन है उनका, जिसमें एकबार उतरे, तो बस उतरते ही चले जाते हैं, निकलने का होश ही नहीं रहता।
    सच में, इस पुस्तक को पढ़ना एक अलग ही एहसास भावनाओं के समुद में अक्षरों की नौका में बैठकर नौका बिहार करने जैसा सुखद रूहानी होता है। हरकीरत हीर जी की रचनाओं में अमृता प्रीतम, महादेवी वर्मा और मीरा साक्षात उपस्थित हो जाती हैं। ‘आग के अक्षर’ पढ़ते हुए अमृता प्रीतम जी की शैली, महदेवी का दर्द और मीरा का कृष्ण को समर्पित प्रेम की तरह महबूब का अंधभक्त होने का एहसास होता रहा। कवियत्री के सीने में दफन आग कलम से क्षणिका के समाहित अक्षरों के रूप में निकलकर पाठकों को बगावत की आग से कभी झुलसाती है, तो कभी सुलगाती है, कभी शरद ऋतु में आँच की तपिश से कोमलता से सहलाती है, तो कभी मोहब्बत की बरसात से सराबोर करती है। कुल मिलाकर ‘आग के अक्षर’ काव्य के क्षणिका विधा की उत्कर्ष संग्रह है। हरकीरत हीर जी को इस सुन्दर रूहानी संग्रह के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
    क्षणिका संग्रह : आग के अक्षर
    लेखिका : हरकीरत हीर
    प्रकाशक : अयन प्रकाशन
    पेज : 223
    मूल्य : 400 रुपए ।

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